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छुट्टी के दिन पर हिंदी में निबंध / Essay on Holiday in Hindi

छुट्टी का दिन कामकाजी व्यक्तियों के लिए किसी त्योहार से कम नहीं है। इसमें लेश मात्र भी संदेह नहीं है कि आज के लोगों का जीवन तनाव युक्त हो गया है। इस भागदौड़ भरी जिंदगी में व्यक्ति स्वयं को तनाव की स्थिति में पाता ही है। अधिकतर दफ्तर जाने वाले व्यक्ति प्रतिदिन काम करते-करते थक जाते हैं। कभी घर का काम तो कभी दफ्तर का या फिर कभी जीवन में कोई मुश्किल आती ही है जिसके फलस्वरुप उनके जीवन में तनाव आ ही जाता है। ऐसी परिस्थिति में उनके लिए छुट्टी का दिन अमृत समान होता है जिसे ग्रहण करते ही वे स्वयं को तनाव रहित पाते हैं। यह एक दिन उनको तनाव से बाहर निकालने में अत्यंत ही प्रभावशाली सिद्ध होता है। छुट्टी के दिन पर हिंदी में निबंध / Essay on Holiday in Hindi छुट्टी का यह दिन सिर्फ कामकाजी लोगों के लिए नहीं अपितु विद्यार्थियों के लिए भी उतना ही अच्छा है। प्रतिदिन पढ़ाई करते करते विद्यार्थी भी स्वयं को तनाव की स्थिति में पाते हैं और उन्हें भी एक ऐसे दिन की आवश्यकता होती है जिस दिन वे अपने घर पर आराम से रह सकें। छुट्टी से 1 दिन पहले विद्यार्थी अत्यंत ही प्रसन्न हो जाते हैं क्योंकि उन्हें यह ज्ञात होत

बचत पर हिंदी में निबंध / Essay on Savings in Hindi

भारत में प्राचीन काल से ही बचत करना अच्छी आदतों में से एक माना जाता है। यह सत्य भी है क्योंकि आज करी गई बचत भविष्य में हमारे काम अवश्य आती है। बचत छोटी भी हो सकती है और बड़ी भी परंतु बचत करनी अवश्य चाहिए।  अधिकतर लोग बचत को सिर्फ धन से संबंधित मानते हैं परंतु ऐसा नहीं है। बचत धन की भी होती है और प्राकृतिक संसाधनों की भी। हम सभी का यह दायित्व है कि हम सभी हमारे देश के प्राकृतिक संसाधनों का अनुचित उपयोग ना करें। बचत पर हिंदी में निबंध / Essay on Savings in Hindi इसका उदाहरण इस प्रकार से है कि यदि आप अपने घर में बिजली के उपकरणों का उपयोग आवश्यकता पड़ने पर ही करते हैं और आवश्यकता पूरी होने के पश्चात उस उपकरण को बंद कर देते हैं तो यह भी बचत की श्रेणी में ही आता है। आप अपने घर से कम दूरी तक जाने के लिए गाड़ी अथवा मोटरसाइकिल जैसे वाहनों का उपयोग ना करें। इसके स्थान पर आप पैदल जा सकते हैं। यदि दूरी थोड़ी ज्यादा है तो आप साइकल का उपयोग भी कर सकते हैं। इससे भी प्राकृतिक संसाधन जैसे पेट्रोल और डीजल की बचत होगी। Read also: सूर्योदय का दृश्य हिंदी निबंध विद्यार्थी को अपनी पढ़ाई पर ही ध्यान के

सूर्योदय का दृश्य हिंदी निबंध / Essay on Sunrise in Hindi

किसी स्थान पर अंधेरी रात बीत जाने के पश्चात जब सूर्य निकलता है तो वह लाल रंग का दिखाई देता है। लाल सूर्य की लालिमा आकाश में स्पष्ट दिखाई देती है। यह हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती है। इसे देखते ही पंछी चहचहाना शुरू कर देते हैं। उनके चहचहाने से ही अन्य जीवों को सवेरा होने का संकेत मिलता है। हम मनुष्य भी इन पंछियों के चहचहाने से ही समझ जाते हैं कि सवेरा हो चुका है। सूर्योदय का दृश्य हिंदी निबंध / Essay on Sunrise in Hindi सूर्योदय का दृश्य इतना सुन्दर और मनमोहक होता है कि इसे केवल देखते रहने का मन करता है। मनुष्य क्षण भर के लिए अपनी सारी दुख परेशानियां भूल जाता है। सूर्योदय से उसके अंदर नई ऊर्जा का संचार होता है जिससे मन अत्यंत प्रसन्न हो जाता है। सूर्योदय के समय वायु शुद्ध होने के कारण लोग बाग बगीचों की सैर के लिए निकल पड़ते हैं। इसके अलावा कुछ लोग प्रतिदिन सूर्योदय के समय बाग बगीचों में सिर्फ सैर करने के स्थान पर योग, प्राणायाम और कसरत भी करते हैं। बच्चे भी सुबह-सुबह खेल खेलने जाते हैं। इस समय बच्चे क्रिकेट , वॉलीबॉल, बैडमिंटन, फुटबॉल आदि खेल खेलते हैं। Read also: मेले का दृश्य

मेले का दृश्य हिंदी निबंध / Essay on Mela in Hindi

मेला हमेशा से भारतीय परंपरा का एक अभिन्न अंग रहा है। मेले में व्यतीत किए गए क्षण सभी को आनंदित कर देते हैं और ये क्षण सदा के लिए व्यक्ति की स्मृति में रह जाते हैं। हर कोई चाहे बच्चा हो या वृद्ध या फिर महिला हो या पुरुष मेले में जाने के लिए हमेशा उत्सुक रहते हैं। इन सभी में बच्चे सबसे अधिक मेले को देखने की इच्छा रखते हैं। उन्हें वहां जादू देखने और झूला झूलने से लेकर खाने की सभी चीजें मिल जाती हैं। बच्चे मेला शुरू होने से कुछ दिन पूर्व ही मेले में जाने के सपने देखने लगते हैं। आज मैं भी आपको मेरे द्वारा मेले में व्यतीत किए गए कुछ क्षण बताना चाहता हूं। हमारे यहां हर वर्ष दशहरा के दिन एक मेला लगता है जिसमें हमारे गांव के लगभग सभी लोग जाते हैं। मैं भी हर वर्ष इस मेले में अपने परिवार और मित्रों के साथ जाता हूं और हर बार की तरह इस बार भी मैनें अपने परिवार और मित्रों के साथ इस मेले में जाने जाने का निर्णय किया। मेले का दृश्य हिंदी निबंध / Essay on Mela in Hindi हम सुबह से ही मेले में जाने के लिए उत्सुक थे और बस दिन ढल जाने की प्रतीक्षा कर रहे थे। वह दिन सभी को काफी बड़ा लग रहा था मगर जैसे तै

नदी के किनारे एक शाम का दृश्य हिंदी निबंध / Nadi ke Kinare ek shaam ka drishya

मैं आज से लगभग 1 वर्ष पहले अपने कुछ मित्रों के साथ अपने गांव गया था। वहां हमने बहुत अच्छा समय बिताया और कुछ ऐसे पल भी जिसे मैं अपने पूरे जीवन काल में कभी नहीं भूल पाऊंगा। ऐसे ही कुछ यादगार पलों में एक पल एक शाम नदी के किनारे का दृश्य भी था।  मुझे आज भी अच्छे से याद है हम सबने उस दिन तय किया था कि आज की शाम नदी के किनारे पर ही बिताएंगे क्यूंकि ये अनुभव हमें शहर की चकाचौंध में नहीं मिलने वाला था। शाम होते ही हम सभी योजना के अनुसार घर से नदी के तट की ओर चल दिए। नदी के किनारे एक शाम का दृश्य हिंदी निबंध रास्ते में हम सभी नदी के विषय पर ही चर्चा करते रहे और पता ही नहीं चला कि कब हम नदी के तट पर पहुंच गए। वहां पहुंचने पर हमें अत्यंत ही आनंद की अनुभूति हुई। लहराते हुए फूल, नदी का बहता जल और चारों ओर हरियाली यें सभी हमारा मन मोह रही थी। हम सभी के मुख पर एक अलग प्रकार की प्रसन्नता का भाव था जिसमें हंसी तो नहीं थी परंतु मन में इतना सुकून जो शायद ही बचपन के अलावा कभी मिला हो। Read also: सुनार पर हिंदी में निबंध प्रसन्नता की इस अवस्था में मग्न होकर हम सभी थोड़े समय तक नदी के किनारे ही बैठे रहे

तेनालीराम की कहानी: कीमती उपहार

युद्ध में विजय प्राप्त होने की खुशी में राजा कृष्णदेव राय ने विजय उत्सव मनाया। इस उत्सव की समाप्ति पर राजा कृष्णदेव राय ने युद्ध में जीत का श्रेय अपने सभी साथियों और सहयोगियों को दिया जिन्होंने इस युद्ध में भाग लिया था। इसके अतिरिक्त उन्होंने अपने मंत्री मंडल के सभी सदस्यों को पुरस्कार देने की भी घोषणा की परंतु एक शर्त के साथ। शर्त यह थी कि प्रत्येक व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति से अलग पुरस्कार लेना होगा अर्थात एक जैसा पुरस्कार दो व्यक्ति प्राप्त नहीं कर पाएंगे। तेनालीराम की कहानी: कीमती उपहार इस घोषणा के पश्चात राजा कृष्णदेव राय ने उस मंडप को चारों ओर से ढकवा दिया जिसमें यह कीमती उपहार रखे हुए थे। जैसे ही राजा कृष्णदेव राय ने सभी को अपना-अपना पुरस्कार छांटने का आदेश दिया वैसे ही सभी मंडप की ओर लपक पड़े ताकि मंडप में रखा सबसे कीमती उपहार उन्हें ही मिले।  थोड़े समय तक धक्का-मुक्की होने के पश्चात सभी ने अपना-अपना कीमती उपहार प्राप्त कर लिया। सभी उपहार कीमती थे इसलिए सभी अपने उपहार से संतुष्ट थे। परंतु अभी भी एक उपहार जिसे किसी ने भी नहीं लिया था बचा हुआ था। सभी मंत्री इस  उपहार को देखकर

तेनालीराम की कहानी: ऊंट का कुबड़

एक बार राजा कृष्णदेव राय ने अपने दरबार के विद्वानों से कुछ प्रश्न पूछे जिनमें तेनालीराम ने उन सभी प्रश्नों का तर्कसंगत उत्तर दिया। इसी बात से प्रसन्न होकर राजा कृष्णदेव राय ने तेनालीराम को एक पूरा नगर उपहार स्वरूप देने का वचन दिया। तेनालीराम ने भी राजा कृष्णदेव राय के समक्ष झुक कर धन्यवाद कहा। तेनालीराम की कहानी: ऊंट का कुबड़ कुछ दिन बीत जाने के बाद राजा कृष्णदेव राय तेनालीराम को दिया अपना वचन भूल गए परंतु तेनालीराम को अभी भी राजा के द्वारा दिया गया वचन याद था और इसीलिए तेनालीराम बड़ा चिंतित था। उसकी चिंता का कारण यह था कि वह राजा से इस विषय पर बात करें, तो कैसे? उसे इस विषय पर राजा से बात करने में हिचकिचाहट तो हो ही रही थी और साथ में अच्छा भी नहीं लग रहा था। इसलिए तेनालीराम एक उचित अवसर की प्रतीक्षा करने लगा। तेनालीराम को यह उचित अवसर तब मिला जब एक अरबी व्यापारी विजय नगर आया। उस अरबी व्यापारी के पास एक ऊंट था, जिसे देखने के लिए बहुत अधिक भीड़ इकट्ठी हो गई क्योंकि उन्होंने ऊंट के बारे में सिर्फ सुना ही था, पर कभी देखने का अवसर नहीं मिला था। Read also: मटके में मुंह कहानी राजा कृष्णद