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मेरा विद्यालय पर हिंदी में निबंध - Essay on my school in hindi

भारतीय संस्कृति में विद्यालय का एक महत्वपूर्ण स्थान रहा है। विद्यालय को शिक्षा का मंदिर कहा गया है जो व्यक्ति को अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाता है। विद्यालय में अध्ययन के पश्चात व्यक्ति ज्ञानी हो जाता है और अपने राष्ट्र के उत्थान में अपनी भागीदारी देता है। प्राचीन काल में गुरुकुल होते थे जहां बच्चे अध्ययन के लिए जाते थे। गुरुकुल में बच्चे अनेक शास्त्रों का अध्ययन करते थे। इसके अलावा उन्हें अनेक प्रकार की विद्याओं की शिक्षा भी दी जाती थी। आज इन्हीं गुरुकुलों का स्थान विद्यालयों ने ले लिया है परंतु आज भी शिक्षकों को समाज में वही मान सम्मान दिया जाता है जो पहले गुरुकुलों में पढ़ाने वाले आचार्यों को दिया जाता था।

मेरा विद्यालय बहुत विशाल एवं सुंदर है जो मेरे घर से लगभग 1.5 किलोमीटर दूर है। मैं प्रतिदिन विद्यालय पैदल ही जाता हूं। मेरे घर के आस-पास ही मेरी कक्षा में पढ़ने वाले अनेक मित्र रहते हैं। हम सभी साथ साथ ही विद्यालय को जाते हैं। सुबह सभी एक चौराहे पर ठीक 7:30 बजे मिलते हैं और वहां से विद्यालय की ओर प्रस्थान करते हैं।

मेरा विद्यालय पर हिंदी में निबंध - Essay on my school in hindi
मेरा विद्यालय पर हिंदी में निबंध - Essay on my school in hindi

मेरे विद्यालय का नाम बी. एस. एम. पब्लिक स्कूल है। विद्यालय केवल दो मंजिल ऊंचा है परंतु इमारत बहुत अधिक क्षेत्र में फैली हुई है। इसके अलावा विद्यालय का मैदान भी बहुत बड़ा है जहां हम क्रिकेट, बैडमिंटन, फुटबॉल, वॉलीबॉल आदि खेल खेलते हैं। विद्यालय के मैदान में चारों ओर बहुत सारे पेड़ पौधे लगे हुए हैं जो विद्यालय के मैदान को और भी अधिक सुंदर बना देते हैं।

विद्यालय में नर्सरी कक्षा से लेकर 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई होती है। विद्यालय में 90 कमरे हैं और प्रत्येक कक्षा में विद्यार्थियों के बैठने के लिए पर्याप्त बेंच हैं जिससे उन्हें पढ़ाई करते समय किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। विद्यालय में लगभग 1500 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं और प्रत्येक विषय को पढ़ाने के लिए अलग-अलग अध्यापक और अध्यापिकाएं हैं। सभी अध्यापक और अध्यापिकाएं अपने अपने विषय में निपुण हैं। यदि किसी विद्यार्थी को पढ़ने में कठिनाई होती है तो उस विषय के अध्यापक या अध्यापिका उस विद्यार्थी की सहायता करते हैं।

हमारे प्रधानाचार्य भी बहुत अच्छे व्यक्ति हैं। वे हम सभी छात्र छात्राओं को प्रार्थना स्थल में प्रतिदिन कुछ न कुछ अच्छी बातें बताते हैं ताकि हम अपने जीवन में उन बातों पर अमल करें और अच्छे मनुष्य बने।

विद्यालय में कंप्यूटर लैब और पुस्तकालय भी है। कंप्यूटर लैब में 50 कंप्यूटर हैं जहां विद्यार्थी कंप्यूटर से संबंधित शिक्षा का अध्ययन करते हैं। इसके अलावा पुस्तकालय में भी सभी कक्षाओं के सभी विषयों की किताबें उपलब्ध हैं। पुस्तकालय में बातें करना सख्त मना है जिससे पुस्तकालय का वातावरण अध्ययन के अनुकूल बना रहे।

विद्यालय में प्रतिमाह प्रतियोगिताएं भी कराई जाती हैं। प्रतियोगिता में कविता, निबंध, चित्रकला, संगीत, खेल आदि चीजें शामिल होती हैं। विद्यालय में प्रतिवर्ष होली, दीपावली, बसंत पंचमी आदि उत्सवों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं जिनमें विद्यार्थी पूरे उत्साह के साथ भाग लेते हैं।

विद्यालय का परीक्षा परिणाम हमेशा अच्छा रहता है। प्रत्येक कक्षा के प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान पर आए विद्यार्थियों को विद्यालय के वार्षिकोत्सव पर पुरस्कृत किया जाता है। इसके अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उत्तम प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को भी इसी दिन पुरस्कृत किया जाता है।

किसी भी राष्ट्र का भविष्य उस राष्ट्र के बच्चे होते हैं। राष्ट्र के उत्थान के लिए बच्चों में नैतिकता का होना अति अनिवार्य है। इसके अलावा उनके पास शैक्षणिक योग्यता का होना भी उतना ही आवश्यक है। यह दोनों चीजें बच्चों को विद्यालय में अध्ययन के पश्चात ही प्राप्त हो सकती हैं। अतः यह कहना गलत नहीं होगा कि विद्यालय नामक पवित्र स्थान से राष्ट्र के उत्थान की नदी बहती है।