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नदी के किनारे एक शाम का दृश्य हिंदी निबंध / Nadi ke Kinare ek shaam ka drishya

मैं आज से लगभग 1 वर्ष पहले अपने कुछ मित्रों के साथ अपने गांव गया था। वहां हमने बहुत अच्छा समय बिताया और कुछ ऐसे पल भी जिसे मैं अपने पूरे जीवन काल में कभी नहीं भूल पाऊंगा। ऐसे ही कुछ यादगार पलों में एक पल एक शाम नदी के किनारे का दृश्य भी था। 



मुझे आज भी अच्छे से याद है हम सबने उस दिन तय किया था कि आज की शाम नदी के किनारे पर ही बिताएंगे क्यूंकि ये अनुभव हमें शहर की चकाचौंध में नहीं मिलने वाला था। शाम होते ही हम सभी योजना के अनुसार घर से नदी के तट की ओर चल दिए।

नदी के किनारे एक शाम का दृश्य हिंदी निबंध
नदी के किनारे एक शाम का दृश्य हिंदी निबंध

रास्ते में हम सभी नदी के विषय पर ही चर्चा करते रहे और पता ही नहीं चला कि कब हम नदी के तट पर पहुंच गए। वहां पहुंचने पर हमें अत्यंत ही आनंद की अनुभूति हुई। लहराते हुए फूल, नदी का बहता जल और चारों ओर हरियाली यें सभी हमारा मन मोह रही थी। हम सभी के मुख पर एक अलग प्रकार की प्रसन्नता का भाव था जिसमें हंसी तो नहीं थी परंतु मन में इतना सुकून जो शायद ही बचपन के अलावा कभी मिला हो।


प्रसन्नता की इस अवस्था में मग्न होकर हम सभी थोड़े समय तक नदी के किनारे ही बैठे रहे और आस पास के मनमोहक दृश्यों का आनंद उठाते रहे। उसके पश्चात हम सभी नदी के तट पर घूमने लगे और घूमने के थोड़े समय पश्चात ही हमें हमारे गांव के एक बुजुर्ग मिले। उनसे मिलकर मुझे बहुत प्रसन्नता हुई क्यूंकि मैं उनसे बहुत लंबे अरसे बाद मिला था। वे भी अक्सर वहां घूमने आते हैं इसलिए वे भी हम सभी के साथ घूमने लगे।

घूमते समय उन्होंने अपने बचपन के दिनों के कुछ अनुभव हमारे साथ साझा किए जिसमें कुछ किस्से मन को मोह लेने वाले थे। उन्होंने बताया जब वे छोटे थे तब आज के लोगों की तुलना में उस समय के लोगों का जीवन अत्यंत ही सरल और सहज था। आम व्यक्ति के पास कोई भी वाहन नहीं हुआ करता था परंतु कुछ गिने चुने बहुत अधिक धनी व्यक्तियों के पास वाहन होते थे। 


इसके अलावा उन्होंने बताया कि तब उस समय आज की तरह घरों में उपयोग होने वाले उपकरण जैसे टीवी, रेफ्रिजरेटर, बल्ब आदि भी नहीं हुआ करते थे। उस समय रेडियो का प्रचलन बहुत अधिक हुआ था क्यूंकि ये ही उस समय मन को बहलाने का एकमात्र साधन था। लोग रेडियो के माध्यम से ही संगीत सुनते थे और समाचार भी रेडियो से ही प्राप्त होते थे।

उन्होंने यह भी बताया कि ये नदी जिसके तट पर हम घूम रहे हैं आज की तुलना में उस समय बहुत चौड़ी हुआ करती थी। इसका बहाव भी अत्यंत ही तीव्र हुआ करता था।


ऐसी ही उन्होंने हमें उस समय की अनेक बातें बताई और हमारा खूब मनोरंजन किया। हम सभी मित्र उन्हें सुनते रहते और वे बातें बताते रहते। हम उनकी बातें सुनने में इतने मग्न थे कि उनके साथ समय कैसा बीता हमें पाता ही नहीं चला। अब सूर्य भी हमें प्रस्थान करने का संकेत दे रहा था और रात में चांद अपना प्रकाश बिखेरने को उतावला था तो हमने भी सोचा कि क्यूं ना अब अपने घर की ओर प्रस्थान किया जाए। हम सभी मित्र उनसे जाने की अनुमति लेकर अपने घर की ओर चल दिए। इस प्रकार नदी के किनारे के दृश्य वाली एक अच्छी शाम व्यतीत कर और कुछ यादें अपने साथ संजोकर हम सभी अपने घर पर पहुंचे।
 

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