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मेले का दृश्य हिंदी निबंध / Essay on Mela in Hindi

मेला हमेशा से भारतीय परंपरा का एक अभिन्न अंग रहा है। मेले में व्यतीत किए गए क्षण सभी को आनंदित कर देते हैं और ये क्षण सदा के लिए व्यक्ति की स्मृति में रह जाते हैं। हर कोई चाहे बच्चा हो या वृद्ध या फिर महिला हो या पुरुष मेले में जाने के लिए हमेशा उत्सुक रहते हैं। इन सभी में बच्चे सबसे अधिक मेले को देखने की इच्छा रखते हैं। उन्हें वहां जादू देखने और झूला झूलने से लेकर खाने की सभी चीजें मिल जाती हैं। बच्चे मेला शुरू होने से कुछ दिन पूर्व ही मेले में जाने के सपने देखने लगते हैं।



आज मैं भी आपको मेरे द्वारा मेले में व्यतीत किए गए कुछ क्षण बताना चाहता हूं। हमारे यहां हर वर्ष दशहरा के दिन एक मेला लगता है जिसमें हमारे गांव के लगभग सभी लोग जाते हैं। मैं भी हर वर्ष इस मेले में अपने परिवार और मित्रों के साथ जाता हूं और हर बार की तरह इस बार भी मैनें अपने परिवार और मित्रों के साथ इस मेले में जाने जाने का निर्णय किया।

मेले का दृश्य हिंदी निबंध / Essay on Mela in Hindi
मेले का दृश्य हिंदी निबंध / Essay on Mela in Hindi

हम सुबह से ही मेले में जाने के लिए उत्सुक थे और बस दिन ढल जाने की प्रतीक्षा कर रहे थे। वह दिन सभी को काफी बड़ा लग रहा था मगर जैसे तैसे सभी ने वह दिन व्यतीत किया। शाम होने के बाद सभी मेले के लिए निकल पड़े। रास्ते में वे मित्र भी मिले जो हमारे साथ मेले में जाने वाले थे और अब मैं और ज्यादा प्रसन्न हो चुका था। 


रास्ते में हंसी मजाक करते करते आखिरकार हम मेले तक पहुंच गए। वहां पहुंचने के पश्चात प्रवेश द्वार पर बहुत अधिक भीड़ होने के कारण हमें धक्का मुक्की का सामना करना पड़ा। बड़ी कठिनाई का सामना करके हम मेले के अंदर प्रवेश कर पाए। मेले में प्रवेश करते ही हम सभी के मुख पर एक मुस्कान आ गई क्यूंकि मेले के अंदर के दृश्य ने मेले के अंदर आने के समय हुई धक्का मुक्की को भुला दिया। अब हम सभी पहले की तरह प्रसन्न थे और मेले में सर्वप्रथम कहां जाया जाए इस बारे में विचार विमर्श करने लगे।

अंत में सभी ने निर्णय किया कि सबसे पहले जादू देखने चलेंगे और निर्णय के अनुसार सभी ने सबसे पहले जादू देखा। मेले में आए जादूगर ने सभी का बहुत अधिक मनोरंजन किया। कभी वह कोई वस्तु गायब कर देता तो कभी उसी वस्तु को दुबारा ले आता। न जाने ऐसे कितने जादू दिखाकर उसने वहां उपस्थित लोगों का कितनी बार मनोरंजन किया होगा यह कोई नहीं बता सकता। कार्यक्रम समाप्त होते ही वहां पर उपस्थित सभी लोगों ने जादूगर के लिए तालियां बजाकर जादूगर की कला के प्रति सम्मान प्रकट किया।


हम सभी भी थोड़े समय तक जादूगर के विषय में ही बात करते रहे क्यूंकि हमें भी जादूगर का दिखाया जादू काफी अच्छा लगा था। अब सभी का मन झूला झूलने को कर रहा था तो सभी झूलों की ओर चल पड़े। वहां हमने तरह-तरह के झूलों का आनंद उठाया। अब हम सभी को काफी भूख लग रही थी इसीलिए सभी खाने से संबंधित मेले में लगी दुकानों से अपनी पसंद के अनुसार खाने की वस्तु लेने लगे। 

इसके पश्चात हम सभी का ध्यान खिलौनों की दुकानों की ओर गया। दुकानदार ने हमें न सिर्फ अनेक तरह के खिलौने बल्कि कुछ सजावटी सामान भी दिखाए। कुछ खिलौने और सजावटी सामान हम सभी को काफी अच्छे लगे जिसमें से कुछ हमने खरीद लिए। हम सभी अब बहुत थक चुके थे और हमारा काफी मनोरंजन भी हो चुका था इसलिए सभी ने एकमत होकर घर लौटने का निर्णय किया।


वास्तव में यदि मेले में जाने का अनुभव एक बार किसी को हो जाए तो वह व्यक्ति हमेशा मेले में जाने के लिए उत्सुक रहता है। मेला न सिर्फ हमारी परंपरा और संस्कृति को दर्शाता है बल्कि समाज को एकजुट करने का कार्य भी करता है। समाज को एकजुट करने से तात्पर्य है कि मेले में समाज में रहने वाले हर प्रकार के लोग आते हैं जिससे यह समाज में सामाजिक सौहार्द को बढ़ाता है।

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